Shatavari Benefits In Hindi-शतावरी के फायदे हिंदी में-Asparagus Benefits In Hindi

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Shatavari Benefits In Hindi-शतावरी के फायदे हिंदी में

परिचय (Introduction)

वनस्पति का प्रकार : लता
वैज्ञानिक नाम : एस्पेरागस रेसमोसुस
सामान्य नाम : सतावर

वानस्पतिक नाम: शतावरी रेसमोसस
संस्कृत — शतावरी
हिन्दी — शतावरी
अंग्रेज़ी — इंडियन ऐस्पैरागस,- एरेस मोसस, हंड्रेड रूट्स
चीनी – तियान मेन डोंग

विभिन्न भाषाओं में नाम :  मराठी- शतावरी। गुजराती- सेमुखा। बंगाली- शतमूली। तेलुगू- एट्टुमट्टी टेंडा। तमिल- सडावरी। कन्नड़- माज्जिगे गड्डे। फारसी- शकाकुल।लैटिन- एस्पेरेगस रेसिमोसस।

शतावरी का अर्थ है “जिसके सौ पति हों या जो बहुतों को स्वीकार्य हो”।आयुर्वेद में, इस अद्भुत जड़ी बूटी को “जड़ी बूटियों की रानी” के रूप में जाना जाता है।

यह मूल रूप से एशिया और यूरोप में पाया जाता है। दुनिया के कई अन्य भागों में भी यह पाया जाता है।अधिकांश यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया , पूरे उत्तरी अमेरिका में पाए जाते हैं और दुनिया भर में इसकी खेती की जाती है.

शतावरी को शतावर के नाम से भी जाना जाता है। यह फैलने वाली लता है, जो प्राकृत रूप से भारत के कई क्षेत्रों में पाई जाती है। इस औषधीय पौधे का उपयोग होम्योपैथी दवाओं में किया जाता है। इसे अँग्रेजी में एस्पेराग्स कहते है।

शतावर की बेल भारत में हर जगह पाई जाती है, लेकिन उत्तरी भारत में शतावर ज्यादा पैदा होता है। शतावर की बेल बाग-बगीचों, बंगलों में सौंदर्य वृद्धि हेतु भी लगाई जाती है। शतावर की बेल पेड़ का सहारा लेकर ऊपर बढ़ती है, जिसमें कई कांटे होते हैं।

इसकी ऊंचाई 4-6 फुट तक होती है।जिसे लोग सजाने के कम में भी लाते हैं।इसके पत्ते पतले , नुकिलेदार हरे-भरे होते हैं।इसके फूल देखने में बहुत छोटे – छोटे , सफ़ेद रंग के सुगन्धित होते हैं।

shatavari/asparagus flowers
shatavari/asparagus flowers

इसके फल हरे रंग के होते है जो पकने पर काले रंग के हो जाते हैं।इसकी जड़ आयुर्वेद के क्षेत्र में उपयोगी है जो इस्तेमाल में लायी जाती है ।

यह लता जाति का काँटेदार पौधा होता है जो जड़ से ही अनेक शाखाओं में फैला हुआ होता है। इसके पत्ते छोटे और सोया (सुआ) जैसे होते हैं। फूल छोटे और सफेद रंग के होते हैं। इसकी शाखाएँ तिकोनी, चिकनी और रेखांकित होती हैं।

इसकी पत्तियां गुच्छों में एक साथ 4 से 6 इंच लम्बी नोकदार, छोटी व नलीदार होती है।फूल सितम्बर – नवम्बर माह में आते है।

इसके एक साथ हजारों फूल लगने के कारण नवम्बर के महीनों में पूरी बेल सफेद नज़र आती है। शतावर के फल गोल, मटर के दाने जैसे पकने पर लाल रंग के लगते हैं, जिसमें 1-2 काले रंग के बीज निकलते हैं।

जड़ फल के समान लम्बी गोल, उंगली की तरह मोटी सफेद, मटमैले, पीले रंग की सैकड़ों जड़ों में निकलती हैं। इन जड़ों को ही औषधि के रूप में इस्तेमाल करते हैं। शतावर का स्वाद फीका होता है।

सीधे या झुका कांटा के साथ एक कंदयुक्त पर्वतारोही, शतावरी आयुर्वेद, दुनिया की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति में इस्तेमाल किया महान कायाकल्प करने वाला जड़ी बूटि है. यह Asparagus racemosus, या भारतीय Asparagus के रूप में जाना जाता है. इसके कंद, सफेद मूली के आकार का होता है, और समूहों में पाए जाते हैं।

भारत में केरल के खूबसूरत उष्णकटिबंधीय (tropical)राज्य में, शतावरी बहुतायत में पाई जाती  है, और यहाँ प्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सकों के औषधीय कार्यों के लिए इसकी जड़ों और पत्तियों का उपयोग किया जाता रहा है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा में, शतावरी को रसायन, या कायाकल्प, प्रतिरक्षा-निर्माण (immune building) जड़ी बूटी के रूप में जाना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार शरीर में तीन महत्वपूर्ण ऊर्जा या दोष होते हैं- वात , पित्त, और कफ . यह  तीनों दोष नाजुक हर व्यक्ति में एक अद्वितीय अनुपात में संतुलित रहते हैं। अच्छे स्वास्थ्य के लिए  इस संतुलन को बनाए रखने से केवल जीवन का आनंद लिया जा सकता है.

शतावरी के गुण पित्त दोषों मे एक अच्छा संतुलन बहाल करने में बेहद कारगर साबित हुई है.

विदेश में उपयोग- ऑस्ट्रेलिया में जड़ी-बूटियों का उपयोग अक्सर जठरांत्र संबंधी (gastrointestinal disorders) विकारों के इलाज के लिए और घावों को बाहरी रूप से धोने के रूप में किया जाता है।

गुण (Property)

शतावर/शतावरी बुद्धि के लिए उत्तम, पेट की जलन, आंखों के लिए लाभदायक, वीर्यवर्धक, ठंडा, दूध को बढ़ाने वाली, बलवर्धक, दस्त तथा वात पित्त, खून की गन्दगी को साफ करना, तथा सूजन आदि को दूर करता है।

 

प्रदर रोग (leucorrhoea) :

प्रतिदिन सुबह-शाम शतावरी चूर्ण 5 ग्राम से 10 ग्राम की मात्रा में थोड़े से शुद्ध घी में मिलाकर चाटने व कुनकुना गर्म मीठा दूध पीने से प्रदर रोग से जल्दी से छुटकारा मिलता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है

शतावरी, सौ बीमारियों का इलाज, फाइटोकेमिकल्स (phytochemicals) से भरपूर है जो न केवल प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है बल्कि शरीर को बड़ी संख्या में संक्रमणों से बचाता है और समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देता है।

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महिला प्रजनन प्रणाली के लिए शतावरी

यह जड़ी बूटी महिला प्रजनन प्रणाली (female reproductive system) से संबंधित समस्याओं में अत्यधिक प्रभावी है।

महिला प्रजनन प्रणाली के लिए शतावरी एक शक्तिशाली महिला-अनुकूल जड़ी बूटी के रूप में जानी जाने वाली शतावरी कई हार्मोनल समस्याओं के इलाज में मदद करती है।

रक्त के भीतर हार्मोनल स्तर को बनाए रखता है, महिला प्रजनन अंगों को मजबूत करता है और अंडों की परिपक्वता को बढ़ाता है।

चिंता-विरोधी प्रभाव

शतावरी की खुराक का उपयोग पारंपरिक रूप से चिंता और अवसाद (Depression)से निपटने के लिए भी किया जाता रहा है।

 

दुष्प्रभाव
गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसका उपयोग करने से पहले एक चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।


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