नीम के 15 आश्चर्यजनक फायदे-Wonderful Benefits Of Neem In Hindi

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नीम के आश्चर्यजनक फायदे (Wonderful Benefits Of Neem In Hindi)

नीम का पेड़, नीम के पत्ते ,नीम का बीज, नीम का फल,नीम की छाल,नीम का तना,नीम की लकड़ी अपने औषधीय गुणों के कारण पारंपरिक इलाज में उपयोगी रहा है। नीम के बारे में कहा जाता है कि एक नीम और सौ हकिम बराबर हैं।

नीम का बॉटनिकल नाम

नीम का बॉटनिकल नाम अजार्डिचटा इंडिका (Azadirachta indica) है। नीम को संस्कृत में निम्ब,अंग्रेजी में इसे मारगोसा तथा भारतीय भाषाओं में नीम और इंडियन लिलेक के नाम से जाना जाता है।

वर्ष 1992 में यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस ने नीम पर शोध किया और एक रिपोर्ट प्रकाशित किया जिसका शीर्षक था- ‘Neem –A tree for solving global problems’। मतलब उस शोध में बताया गया है कि नीम एक ऐसा पेड़ है जिसमें दुनिया की तमाम समस्याओं का इलाज  है।

नीम की छाल में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो दांतो और मसूड़ो में लगने वाले कई प्रकार के बैक्टरिया को पनपने नही देते है जिससे दांत स्वस्थ व मजबूत रहते है।

नीम की दातुन करने से दांत व मसूड़े मजबूत होते है तथा दांत में कीड़े नही लगते तथा मुँह से दुर्गन्ध नही आती है।

चार हजार सालों से आयुर्वेद की सर्वरोगनिवारणी दवा नीम का लोहा एलोपैथ तो मानने लगी है और अब अमेरिका समेत यूरोप की मेडिकल साइंस भी नीम को वंडर ड्रग (Wonder Drug) कहने लगी है।

पर्यावरण, स्वास्थ्य से लेकर मेडिकल साइंस में नीम की महत्ता बढ़ने लगी है।नीम ही एकमात्र ऐसा पेड़ है जिसके सभी भागों (पत्तियां, बीज, फल, छाल, तना, लकड़ी) में औषधीय गुण पाए जाते हैं। सभी भागों का उपयोग छोटे से लेकर गंभीर और असाध्य बीमारियों के इलाज में किया जाता है।

neem ke patte
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आर्युवेद में नीम के महत्व

आर्युवेद में नीम के महत्व के बारे में सबसे ज्यादा चर्चा की गई है।आज भी नीम को गांव की डिस्पेंसरी कहा जाता है।

गांवों में कहा जाता है कि घर के दरवाजे पर नीम के पेड़ लगाने से बीमारियां पास नहीं फटकेंगी क्यूंकि नीम वातावरण और वायु को शुद्ध करके रखता है।

नीम के वृक्ष को इसके अनेक प्रकार के उपयोगी गुणों के कारण सही अर्थों में आश्चर्य वृक्ष कहा जा सकता है।

नीम लंबे समय से एक औषधीय वृक्ष के रूप में उपयोग किया जाता रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में उपयोग किया जाता रहा  है – चाहे वह निर्माणकार्य की लकड़ी हो, ईंधन के रूप में काम में आने वाली लकड़ी हो, चारा हो, तेल हो, उर्वरक हों, कीट-रोधी हों या फिर सर्वव्यापी `दातुन` हो।

चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन चिकित्सा ग्रंथों में  नीम का उल्लेख मिलता है. :-

निम्ब शीतों लघुग्राही कतुर कोअग्नी वातनुत।
अध्यः श्रमतुटकास ज्वरारुचिक्रिमी प्रणतु ॥

अर्थात नीम शीतल, हल्का, ग्राही पाक में चरपरा, हृदय को प्रिय, अग्नि, वाट, परिश्रम, तृषा, अरुचि, क्रीमी, व्रण, कफ, वामन, कोढ़ और विभिन्न प्रमेह को नष्ट करने वाला होता है।

नीम को आयुर्वेद में एक बहुत ही उपयोगी वनस्पति माना गया है। नीम का प्रयोग अनेक रोगों में चमत्कारी असर दिखाता है।

नीम के उपयोग

नीम के उपयोग से कई लाइलाज बीमारियों को ठीक किया जा सकता है ।आज हम नीम के कुछ ऐसे गुणों के बारे में जानेंगे जिससे नीचे लिखी समस्याओं में जादू सा असर होता है-

1)रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने में नीम का उपयोग

नीम के छाल से निकाले गए रस के सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता मजबूत होती है। नीम के तेल के उपयोग करने से शरीर के कोशिकाएं रोग से लड़ने के लिए हमेशा मजबूत बनी रहती है।

2)कटने और जलने पर नीम के पत्ते के फायदे

नीम की पत्तियों और तेल में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। इसलिए कटे हुए स्‍थान पर नीम का तेल लगाने से टिटनेस का भय नहीं रहता।जले हुए स्‍थान पर नीम का तेल या पत्‍तों को पीस कर लगाने से आराम मिलता है।

neem ke patte ke fayde
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3)प्राकृतिक कीटनाशक है नीम

नीम का प्रयोग अनेक कार्यों में किया जाता है| प्रत्येक सप्ताह या दो सप्ताह में एक बार नहाने के पानी में नीम की पत्तियों को डालकर गुनगुना गर्म करके तथा फिर इससे स्नान करने से,  त्वचा संबंधी रोग जैसे दाद-खाज, खुजली, फंगस, लाल चकते इत्यादि नहीं होंगे तथा यदि कोई चर्म रोग पहले से है तो उसमें राहत मिलेगी।

4)जुकाम होने पर नीम का उपयोग

नीम एंटीसेप्टिक, एंटी बेक्टेरियल, एंटीवायरल, एंटीएलर्जिक आदि गुणों से भरपूर है।जिन लोगों को बार बार-बुखार और मलेरिया का संक्रमण होता है, उनके लिए नीम एक रामबाण औषधि है।

जुकाम होने पर नीम की पत्तियां काली मिर्च के साथ पीसकर गोलियां बना लें। गर्म पानी के साथ ये तीन−चार गोलियां खाने से जुकाम ठीक हो जाता है।

5)मलेरिया का इलाज

नीम मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को दूर रखने में अत्यन्त सहायक है।कहा जाता है की जिस वातावरण में नीम के पेड़ रहते हैं, वहाँ मलेरिया नहीं फैलता है। नीम के पत्ते जलाकर रात को धुआं करने से मच्छर नष्ट हो जाते हैं और विषम ज्वर (मलेरिया) से बचाव होता है।

मानसून के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है, यही वजह है कि साल के इस समय में मलेरिया जैसी बीमारियों के होने का खतरा होता है। इसलिए मानसून के समय नीम की पत्तियां का प्रयोग काफी फायदेमंद होता है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें मौजूद घटक गेदुनिन मलेरिया जैसी बीमारियों को दूर रखने में विशेष भूमिका निभाता है और मलेरिया के इलाज में भी बहुत उपयोगी है। और अगर संभव हो तो घर के हर कोनों में नीम के पत्तों को थोड़ा कुचल कर रखा जाय तो नीम की गंध से मच्छर के घर के अन्दर आने में कमी होगी।

6)पालतू जानवरों को दे कीड़ों से राहत :

घर में पालतू जानवरों जैसे कुत्ता, गाय, और बिल्ली आदि को कीड़े लग जाते हैं और धीरे-धीरे ये कीड़े सारे शरीर में फैलने लगते हैं।ऐसे में नीम के तेल में किसी हल्के साबुन को मिलाकर पेस्ट बनाकर और इस मिश्रण को पालतू जानवरों के उपर छिडकने से उन्हें रहात मिल सकती है।

7)रोके बढ़ती हुई उम्र को 

नीम में पाये जाने वाले तत्व ऑक्सीकरण रोधक होते हैं जो चेहरे में होने वाले परिवर्तनों को रोक देते हैं। नीम के तेल के उपयोग से चेहरे की झुर्रियां कम होती है और बढ़ती हुई उम्र रूक जाती है।

8)रोके बालों को झड़ने से

नीम के तेल में मौजूद गुण बालों को टूटने नहीं देते और बालों को जड़ से मजबूत बनाने के साथ ही नीम के तेल से सिर में जूं भी नहीं रहते है। जिन लोगों को सिर में रूसी की समस्या है वे नीम के तेल का उपयोग कर सकते है इससे निश्चित ही लाभ मिलेगा।

9)खुजली/एक्जिमा को दूर करे

जो लोग अधिक खुजली से परेशान रहते हैं उन्हें नीम के तेल से फायदा मिलता है। यह त्वचा सबंधी बीमारियों को दूर करता है। खुजली से होने वाले दर्द और तेज जलन में नीम का तेल राहत देता है। पानी में नीम के तेल की कुछ बूंदे डालकर नहाना चाहिए।

नीम के तेल में एंटीबैक्टेरियल त्तवों की वजह से एक्ने(acne) के निशान धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं।नीम के तेल का उपयोग फेसवास के रूप में भी किया जा सकता है।

10)बनाएं दांतों को सुरक्षित 

नीम में एंटी बेक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं जो दांतों में होने वाली समस्यओं जैसे दांतों के दर्द,दांतों में सड़न,दांतों का कैंसर आदि में लाभ पहुंचाता है।

नीम की छाल में ऐसे गुण होते हैं, जो दाँतों और मसूढ़ों में लगने वाले तरह-तरह के बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते हैं, जिससे दांत स्वस्थ व मज़बूत रहते हैं।

नीम की दातुन करने से दांत व मसूढे मज़बूत होते है और दांतों में कीडा नहीं लगता है, तथा मुंह से दुर्गंध आना बंद हो जाता है। प्रयास करना चाहिए की हफ्ते में कम से कम एक से दो बार नीम के दातुन का प्रयोग किया जाय।

11)कीटनाशक के रूप में उपयोग

विश्व स्वास्थ संगठन का अनुमान है कि हर साल 20000 लोग विषैले रासायनिक कीटनाशकों के कारण मारे जाते हैं। रासायनिक कीटनाशक के दुष्प्रभाव को ध्यान में रखते हुए नीम से कीटनाशक बनाए जाने लगा है।

अनाज के भंडारण  में भी नीम की पत्तियों का उपयोग कीटों को रोकने में कारगर साबित होता रहा है।आजकल धान की फसल को बचाने के लिए नीम का इस्तेमाल यूरिया की कोटिंग के रुप में किया जा रहा है।

यह नाइट्रोजन को आस्थिर करने वाले जीवाणुओं को निष्क्रिय बनाता है। जैविक कृषि में भी नीम का उपयोग हो रहा है।

12)खिलाड़ियों के लिए लाभकारी 

स्पोर्ट्स के खिलाडियों के लिए नीम का तेल लाभकारी होता है। अधिकतर एथलीट्स को पैर संबंधी चोट लगती रहती है जिससे संक्रमण होने का खतरा ज्यादा होता है।

नीम के तेल में पाये जाने वाले एंटी-फंगल गुण चोट पर लगे फंगस से लड़ने में मददगार होते हैं। नीम के तेल में नारियल का तेल मिलाकर चोटिल जगह पर लगाने से हर तरह के चोट, फोड़े, फुंसी में लाभ मिलता है।

13)पर्यावरण के संतुलन में उपयोगिता 

दुनिया में बढ़ रहे ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण प्रदूषण के चलते नीम का महत्व पर्यावरण संतुलन में बढ़ गया है। जैविक खेती में नीम का महत्व बढ़ गया है।

नीम वातावरण के आक्सीजन को शुद्ध करता है, इसके अलावा बाढ़ नियत्रंण, भू-क्षरण को रोकना, भूमि उर्वरता, वायु रोधक में भी नीम का अहम योगदान है. नीम की लकड़ी मजबूत होती है और इसमें दीमक नहीं लगती। नीम का उपयोग सामाजिक वानिकी(social forestry) में भी हो रहा है।

14)परिसंचरण को बढ़ावा देता है

नीम की पत्तियां रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करने में मदद करती हैं जिससे रक्त का संचार बढ़ता है और हृदय गति में वृद्धि होती है। यह असंगत(inconsistent) दिल की धड़कन को शांत करता है और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित भी करता है।

नीम के पत्तों को एक अत्यधिक प्रभावी रक्त शोधक माना जाता है साथ ही  नीम के पत्तों का अर्क रक्त को साफ करने, संक्रमण से बचाने वाले हानिकारक विषाक्त पदार्थों को खत्म करने के साथ-साथ शरीर के भीतर मुक्त कणों(free radicals) से होने वाली समस्याओं को दूर करने में फायदेमंद होता है।

15)घाव भरता है

नीम अपने एंटीसेप्टिक गुणों के कारण सेप्टिक संक्रमण को रोकता है।यह किसी भी बदसूरत निशान को छोड़े बिना घावों को ठीक कर सकता है।नीम के तेल में आवश्यक फैटी एसिड होते हैं, जो घाव भरने में मदद करते हैं।

नीम की पत्ती का खाली पेट सेवन

नीम की पत्ती का खाली पेट सेवन करने से आपका खून साफ होगा। नीम की पत्ती मधुमेह जैसी बीमारियों को भी सही करने में बहुत कारगर साबित होता है।

नीम के पत्ती के सेवन से हमारे रक्त में उपस्थित शर्करा को नियंत्रित किया जा सकता है। यह मधुमेह जैसी खतरनाक बीमारी को भी रोकने के लिए बहुत कारगर साबित होता है।

नीम के पत्ती के अंदर बहुत सारे ऐसे यौगिक गुण उपलब्ध हैं जो मधुमेह जैसी बीमारियों को रोकने और इससे सुरक्षित रखने के लिए पर्यापत है।

जिन लोगों को मधुमेह जैसी खतरनाक बीमारियों का शिकायत है उन्हें खाली पेट नीम की चार से पांच पत्तियों का सेवन रोजाना जरूर करना चाहिए। यह उपचार आपको मधुमेह की बीमारी से छुटकारा दिलाने के लिए कारगर होगा।

सावधानी: नीम की पत्तियों को खाली पेट खाने से कई फायदे होते हैं। लेकिन एक महीने से अधिक खाली पेट  इसका सेवन न करें।यदि आवश्यक हो, तो इस संबंध में किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह लिया जा सकता है।

नीम के और भी हैं कई उपयोग

नीम के तेल का उपयोग

नीम के तेल में कई औषधीय गुण होते हैं । नीम का तेल नीम के फलों से निकाला जाता है। यह तेल बेहद ही सुगंध वाला होता है। वैदिक काल से ही नीम के तेल का प्रयोग किया जाता रहा है।

नीम का तेल कई प्रकार के इलाजों और दवाई के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है। नीम के तेल में इतने उपयोगी गुण हैं जो आपकी सेहत और सौंदर्य दोनों को ही फायदा पहुंचा सकते हैं।

दे मच्छरों से राहत :
यदि मच्छरों से परेशान हो तो नीम के तेल की 12 बूंदों को एक कटोरा नारियल तेल में मिलाकर शरीर पर मालिश करें इससे आपको मच्छर काटेगें नहीं।

घुंघराले बालों को सीधा करें 
नीम के तेल से बालों पर मालिश करने से घुंधराले बाल ठीक होते हैं। नीम के तेल से बालों पर शैंपू करने से कुछ समय बाद बाल सीधे होने लगते हैं।

नीम का कारोबार

नीम की छाल से डाइ और दांतो के धोने वाले मंजन बनाए जाते हैं। बीज से मिथेन गैस और पत्तियों से जानवरों के फूड्स भी बनाए जाते हैं। कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में चेहरे पर लगाने वाली क्रीम, लोशन, फेस पाउडर और एंटीसेप्टिक क्रीम बनाने में भी नीम का इस्तेमाल हो रहा है।

कागज के कारखाने, फार्मा इंडस्ट्री में दवा बनाने में, कपड़ा इंडस्ट्री में डाई और धागे बनाने के लिए और फूड इंडस्ट्री में जेली आदि बनाने में नीम का इस्तेमाल हो रहा है।

एक अनुमान के अनुसार लगभग 2 करोड़ नीम के पेड़ भारत में हैं और 50 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का नीम का कारोबार हर साल हो रहा है।

नीम के कुछ घरेलू उपयोग (Common Daily Uses of Neem)

– नीम के तेल और वैसलीन को साथ मिलाकर पेस्ट बनाएं। यह मच्छर के काटने के बाद हुए खुजली, छोटे घाव, कटे तथा जले में आराम देता है।

– स्किन को तरोताजा रखने के लिए नीम की पत्तियों से बनी चाय और पानी उबाल कर स्नान करना चाहिए।

– खुजली तथा आंखों के रोग में नीम की पत्तियों को उबाल कर ठंडे होने पर आंख या खुजली की जगह रूई से साफ करने से काफी आराम मिलता है।

– एथलीट के लिए नीम के उबले हुए पानी से पैर धोने तथा नीम की चाय पीना लाभदायक होता है।

– नीम और नारियल का तेल सिर पर लगाने से बालों की रूसी खत्म हो जाती है।

– गले में खराश होने पर नीम की पत्तियों को उबाल कर थोड़ा शहद मिलाकर गरारा करने से आराम मिलता है।

नीम और नींबू का उपयोग

दस से बीस नीम की पत्तियों को सुखाएं। अब सूखी पत्तियों को पीसकर उसमें से एक चम्मच पाउडर लें और इसे एक चम्मच नींबू के रस और दो चम्मच गुलाब जल के साथ मिलाएं। फिर अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। त्वचा की तैलीयता कम हो जाएगी, और किसी भी तरह के त्वचा संक्रमण का कोई खतरा नहीं होगा।

नीम का लेप

नीम हमारे लिए बहुत फायदेमंद है, इसका सेवन करने से कई तरह के चर्मरोग और दूसरी शारीरिक व्‍याधियां दूर होती हैं। यह तनाव के लिए अच्‍छा घरेलू उपचार है। तनाव दूर करने के लिए माथे पर नीम का लेप लगाने से भी लाभ मिल सकता है।

नीम के पत्ते से स्नान

अगर आपको खुलजी की बीमारी काफी दिनों से हो तो 40 से 50 हरे नीम के पत्ते को थोड़े गरम पानी में 2 मिनट तक खौला लें और उसे नहाने वाले पानी में मिला दें | अब इस पानी से स्नान करे | इस प्रक्रिया को कम से कम 1 सप्ताह इस्तेमाल में लायें और अंतर देखे |

यदि मच्छरों से परेशान हो तो नीम के तेल की 12 बूंदों को एक कटोरा नारियल तेल में मिलाकर शरीर पर मालिश करें इससे आपको मच्छर काटेगें नहीं।

 

सावधानी

– कोई भी व्यस्क व्यक्ति अधिकतम 10 हफ्ते तक लगातार नीम का सेवन मुंह से कर सकता है। त्वचा पर नीम का लेप दो हफ्ते तक लगातार लगा सकता है। मगर इसके बाद लगातार नीम का सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है। नीम का ज्यादा सेवन किडनी और लीवर को डैमेज कर सकता है।

– नीम के बीज और तेल को बच्चों के पहुंच से दूर रखना चाहिए। अगर बच्चे यह मुंह में लें ले तो उल्टी, दस्त और बेहोशी तक हो सकती है।

– गर्भवती महिलाएं और बच्चों को स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए नीम का सेवन चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही करना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान नीम खाने से बच्चा गिरने का खतरा रहता है।

– डायबिटीज के मरीजों के लिए नीम का सेवन फायदेमंद तो है मगर इसका ज्यादा सेवन ब्लड में ग्लुकोज के लेवल को काफी कम कर सकता है जो खतरनाक है।


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2 thoughts on “नीम के 15 आश्चर्यजनक फायदे-Wonderful Benefits Of Neem In Hindi”

  1. आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी है नीम। इस पोस्ट में नीम के विविध प्रकार के फायदों के बारे में आपने विस्तार से वर्णन किया है। मुझे इससे बहुत लाभ हुआ।

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    • आपका बहुत बहुत धन्यवाद। मै काफी दिनों से ब्लॉगिंग से दूर था। अब जल्दी ही आपको और अच्छी जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

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