गिलोय के 15 फायदे तथा लाभ हिंदी में-Giloy Benefits In Hindi

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गिलोय/गुडूची

(अंग्रेजी:टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया)

गिलोय पान के पत्ते की तरह की एक औषधिय बेल होती है।यह एक लंबा चढ़ाई वाला झाड़ी है जो इसके उपयोग के माध्यम से कई अद्भुत चिकित्सीय मूल्यों के लिए जाना जाता है।

संस्कृत में  गिलोय को ‘अमृता’ के रूप में जाना जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘अमरता की जड़’, इसकी प्रचुर मात्रा में औषधीय गुणों के कारण इसको इस नाम से जाना जाता है।
गिलोय का तना सबसे अधिक उपयोगी होता है, लेकिन जड़ का भी उपयोग किया जा सकता है।
अमृत के गुणों वाली गिलोय की बेल लगभाग भारत वर्ष के हर गाँव शहर बाग़ बगीचे में और वन उपवन में बहुतायत से पायी जाती है यह मैदानों, सड़कों के किनारे, जंगल, पार्क, बाग-बगीचों, पेड़ों-झाड़ियों और दीवारों पर लिपटी हुई दिखाई दे जाती है।

नीम गिलोय विशेष गुणकारी होता है

नीम पर चढ़ी गिलोय में सब से अधिक औषधीय गुण पाए जाते हैं, नीम पर चढी हुई गिलोय नीम का गुण अवशोषित कर लेती है।

गिलोय में पाए जाने वाले तत्व

पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और तने में स्टार्च भी मिलता है। कई प्रकार के परीक्षणों से ज्ञात हुआ की वायरस पर गिलोय का प्राणघातक असर होता है। इसमें सोडियम सेलिसिलेट होने के कारण से अधिक मात्रा में दर्द निवारक गुण पाये जाते हैं।
गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।गिलोय में एंटीबायटिक, एंटी वायरल और एंटीएजिड गुण भी होते हैं।
इस औषधीय जड़ी बूटी का उपयोग व्यापक रूप से बुखार, पीलिया, त्वचा रोग, कब्ज, तपेदिक और कुष्ठ जैसी कई बीमारियों से लड़ने के लिए प्राकृतिक प्रतिरक्षा को बढ़ाने में अपनी प्रभावशीलता के लिए किया जाता है।
गिलोय के तने से प्राप्त स्टार्च “गुडुची-सत्व” के रूप में जाना जाता है। यह अत्यधिक पौष्टिक और पाचक है।

वैज्ञानिको के अनुसार :

गिलोय की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर यह पता चला है कि इसमें गिलोइन नामक कड़वा ग्लूकोसाइड, वसा अल्कोहल ग्लिस्टेराल, बर्बेरिन एल्केलाइड, अनेक प्रकार की वसा अम्ल एवं उड़नशील तेल पाये जाते हैं।

वायरस पर गिलोय का असर

कई प्रकार के परीक्षणों से ज्ञात हुआ की वायरस पर गिलोय का प्राणघातक असर होता है।
यह क्षय रोग के जीवाणुओं की वृद्धि को रोकती है। यह इन्सुलिन की उत्पत्ति को बढ़ाकर ग्लूकोज का पाचन करना तथा रोग के संक्रमणों को रोकने का कार्य करती है।
तने का चूर्ण भूरा या गहरा भूरा, विशिष्ट गंध, कड़वा स्वाद और अपच, बुखार और मूत्र रोगों में प्रयोग किया जाता है।

गिलोय के कुछ अन्य गुण

गिलोय गुण में हल्की, चिकनी, प्रकृति में गर्म, पकने पर मीठी, स्वाद में तीखी, कड़वी, खाने में स्वादिष्ट, भारी, शक्ति तथा भूख को बढ़ाने वाली, वात-पित्त और कफ को नष्ट करने वाली, खून को साफ करने वाली, धातु को बढ़ाने वाली, प्यास, जलन, ज्वर, वमन, पेचिश, खांसी, बवासीर, गठिया, पथरी, प्रमेह, नेत्र, केश और चर्म रोग, अम्लपित्त, पेट के रोग, मूत्रावरोध (पेशाब का रुकना), यकृतरोग, मधुमेह, कृमि और क्षय (टी.बी.) रोग आदि को ठीक करने में लाभकारी है।

यूनानी पद्धति में गिलोय का उपयोग

यूनानी पद्धति के अनुसार गिलोय की प्रकृति गर्म और खुश्क होती है। यह तीखा होने के कारण से पेट के कीड़ों को मारता है। यह सभी प्रकार के बुखार में बहुत ही लाभदायक है।
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आइये अब हम गिलोय/गुडूची के 15 गुणों के बारे में चर्चा करते हैं

1)इम्युनिटी बढ़ाने मे गिलोय का उपयोग

गिलोय एक ऐसी जड़ी बूटी है जो इम्युनिटी(प्रतिरक्षा) को बढ़ाने में मदद करती है।यह एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर है जो फ्री-रेडिकल्स से लड़ता है तथा कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है और बीमारियों से छुटकारा दिलाता है।

गिलोय शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को दूर करने में मदद करता है, रक्त को शुद्ध करता है, बैक्टीरिया से लड़ता है जो बीमारियों का कारण बनता है।

2)बुखार में गिलोय के लाभ

आयुर्वेद के अनुसार गिलोय बुखार को दूर करने की सबसे अच्छी औषधि मानी जाती है। यह सभी प्रकार के बुखार जैसे टायफाइड (मियादी बुखार), मलेरिया, मंद ज्वर तथा जीर्ण ज्वर (पुराने बुखार) आदि के लिए बहुत ही उत्तम औषधि है। इससे गर्मी शांत करने की शक्ति होती है।

 यह तीखा होने के कारण से पेट के कीड़ों को मारता है। यह सभी प्रकार के बुखार में बहुत ही लाभदायक है।

3)प्लेटलेट बढ़ाने में गिलोय के गुण

गिलोय के 6″ तने को लेकर कुचल ले उसमे 4 -5 पत्तियां तुलसी की मिला ले इसको एक गिलास पानी में मिला कर उबालकर इसका काढा बनाकर पीजिये।

और इसमें पपीता के 3-4 पत्तो का रस मिला कर लेने दिन में तीन चार लेने से रोगी को प्लेटलेट कीमात्रा में तेजी से इजाफा होता है प्लेटलेट बढ़ाने का इस से बढ़िया कोईइलाज नहीं है यह चिकन गुनियां डेंगू स्वायन फ्लू और बर्ड फ्लू में रामबाणहोता है।

और इसके साथ ही तीन चम्मच एलोवेरा का गुदा पानी में मिला कर नियमित रूप से सेवन करते रहने से कोई भी बीमारी जल्दी पास नहीं आती।

4)फटी त्वचा में गिलोय के लाभ

फटी त्वचा के लिए गिलोय का तेल दूध में मिलाकर गर्म करके ठंडा करें। इस तेल को फटी त्वचा पर लगाए वातरक्त दोष दूर होकर त्वचा कोमल और साफ होती है।

गिलोय और एलोवेरा का दो दो चम्मच जूस लेने से त्वचा में ग्लो(चमक) आती है.

giloy ke patte ke fayde
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5)खुजली से छूटकारा

गिलोय के पत्तों को हल्दी के साथ पीसकर खुजली वाले स्थान पर लगाने और सुबह-शाम गिलोय का रस शहद के साथ मिलाकर पीने से रक्त विकार दूर होकर खुजली से छुटकारा मिलता है।

त्वचा की खुजली के उपचार में गिलोय तेल का उपयोग और घावों के लिए एक एंटीसेप्टिक और बाहरी रूप से कुष्ठ और खुजली के लिए भी लाभदायक है.

6)डायरिया से बचाव में

डायरिया खासकर गर्मियों में लोगों को ज्यादा अपना शिकार बनाता है। इस बीमारी में शरीर से बहुत ज्यादा मात्रा में पानी भी निकल जाता है। मरीज को बार-बार दस्त और उल्टी शुरू हो जाते हैं और वह बहुत कमजोर महसूस करने लगता है।

जबकि गिलोय की पत्तियों से तैयार किया गया जूस एनर्जी से भरपूर होता है और इसके साथ साथ-साथ यह स्टूल (मल) से जुड़ी हुई समस्याओं को ठीक करके डायरिया के उपचार में काफी मदद कर सकता है।

पाचन सम्बंधित कई बिमारियों में लाभ

यह पाचन संबंधी बीमारियों जैसे कि हाइपरएसिडिटी, कोलाइटिस, कृमि संक्रमण, भूख न लगना, पेट में दर्द, अत्यधिक प्यास और उल्टी और यहां तक कि यकृत विकारों जैसे हेपेटाइटिस में भी मदद करता है।

7)उल्टी में गिलोय के फायदे

गिलोय के रस में मिश्री मिलाकर दिन में दो बार पीने से गर्मी के कारण से आ रही उल्टी रूक जाती है। गिलोय के रस में शहद मिलाकर दिन में दो तीन बार सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है।

गिलोय के तने का काढ़ा बनाकर ठण्डा करके पीने से उल्टी बंद हो जाती है.

8)पीलिया रोग में गिलोय से फायदे

आयुर्वेद के अनुसार गिलोय की बेल गले में लपेटने से भी पीलिया में लाभ होता है।

गिलोय के काढ़े में शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।

9)कैंसर के उपचार में

गिलोय का सेवन एक स्वस्थ व्यक्ति भी कर सकता है जो उसे कई प्रकार की बीमारियों की चपेट में आने से बचाएगा। इतना ही नहीं, जो लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज करवा रहे हैं वह भी इस जूस का नियमित रूप से सेवन कर सकते हैं।

रिसर्चगेट के अनुसार गिलोय में एंटीकैंसर एक्टिविटी पाई जाती है जो कैंसर के उपचार में मदद तो प्रदान करती ही है, साथ ही साथ लोगों को इसकी चपेट में आने से भी बचाए रखने का काम कर सकती है।

10)बोन फ्रैक्चर में

कई बार लोगों को किसी दुर्घटना या फिर बच्चों को खेलने के दौरान ऐसी गंभीर चोट लग जाती है कि उनकी हड्डी में फ्रैक्चर हो जाता है।

एनसीबीआई ने एक रिपोर्ट में यह कहा है कि अगर गिलोय की पत्तियों को पीसकर इसका जूस पीया जाए और इसकी पत्तियों को हल्का-सा गर्म करके चोट वाली जगह पर लगाया जाए तो उससे फ्रैक्चर वाली जगह पर दर्द में कमी का अनुभव होता है।

इसलिए जिन लोगों को बोन फ्रैक्चर की समस्या हो वह इसके दर्द से बचे रहने के लिए गिलोय का सेवन कर सकते हैं।

11)दर्द निवारण में गिलोय के लाभ

इसमें सोडियम सेलिसिलेट होने के कारण से अधिक मात्रा में दर्द निवारक गुण पाये जाते हैं।

चिकित्सा की वैज्ञानिक दुनिया की पेशकश करने के लिए बहुत कुछ के साथ, टीनोस्पोरिया संयंत्र वास्तव में एक अविश्वसनीय स्रोत के रूप में कार्य करता है

12)एंटी एजिंग गुणों से भरपूर

बढ़ती हुई उम्र के प्रभाव को हर कोई छिपाने की इच्छा रखता है। ऐसा मुमकिन भी है अगर डायट और फिटनेस पर खास ध्यान दिया जाए। वहीं, गिलोय में एंटीएजिंग एक्टिविटी भी पाई जाती है। इसलिए इसका नियमित रूप से किया गया सेवन आपके शरीर में उम्र के बढ़ते हुए प्रभाव को कम करने में काफी सक्रिय रूप से कार्य कर सकता है।

13)टी.बी. के इलाज में गिलोय के उपयोग

सामान्य रूप से भारत के कई समुदाय और जनजातियाँ, और विशेष रूप से दक्षिण भारत, पारंपरिक रूप से विभिन्न संक्रमणों के इलाज के लिए औषधीय पौधों का उपयोग करते हैं
टीनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया टीबी के इलाज के लिए दावा किए जाने वाले पौधे में से एक है और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है

giloy ke patte aur tane ke fayde
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14)गठिया के इलाज में गिलोय का उपयोग

गिलोय में  एंटी-आर्थराइटिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो गठिया और इसके कई लक्षणों के इलाज में मदद करते हैं। जोड़ों के दर्द के लिए गिलोय के तने के चूर्ण को दूध में उबालकर सेवन किया जा सकता है।

इसका उपयोग अदरक के साथ रूमेटोइड गठिया के इलाज के लिए किया जा सकता है।

दक्षिण भारत में पारंपरिक उपयोग में पौधे की पत्तियों को सेंधा नमक के साथ चबाया जाता है और इसका अर्क गठिया से ठीक होने के लिए निगल लिया जाता है।

15)चिंता और तनाव कम करने में लाभदायक

क्या आप जानते हैं कि गिलोय को एडाप्टोजेनिक जड़ी बूटी के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है? यह मानसिक तनाव के साथ-साथ चिंता को कम करने में मदद करता है। यह विषाक्त पदार्थों से छुटकारा पाने में मदद करता है, याददाश्त को बढ़ाता है, आपको शांत करता है और अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर एक उत्कृष्ट स्वास्थ्य टॉनिक बनाता है।

कोई भी प्राकृतिक हर्बल पदार्थ (जैसे जिनसेंग) जो शरीर को तनाव के अनुकूल बनाने में मदद करता है, और शरीर के कार्यों पर सामान्य प्रभाव डालता है

 

सावधानी:

गुडूची/गिलोय के सेवन से कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होते हैं क्योंकि यह एक प्राकृतिक और सुरक्षित हर्बल उपचार है।

हालांकि, कुछ मामलों में – गिलोय के इस्तेमाल से कब्ज और ब्लड शुगर लेवल कम हो सकता है।

इसलिए यदि आप मधुमेह रोगी हैं और लंबे समय से गिलोय का सेवन कर रहे हैं, तो नियमित रूप से अपने रक्त शर्करा के स्तर की निगरानी करें।

इसके अलावा, अगर आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं तो गिलोय से बचें।बेहतर होगा की इस अवस्था में चिक्सकीय परामर्श के बाद ही इसका सेवन करें.


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  1. Miranda House University of Delhi – मिरांडा हाउस एक गर्ल्स कॉलेज है ये दिल्ली यूनिवर्सिटी के लोथ कैम्पस मे स्थित है मिरांडा हाउस की स्थापना सन् 1948 मे की गई थी। मिरांडा हाउस को एन एस के द्वारा A+ ग्रेड दिया गया है। मिरांडा हाऊस पूरी दुनिया की नंबर 1 कॉलेज है। इस कॉलेज मे एडमिशन लेना बहुत ही बड़ी बात है। आज हम आपको मिरण्डा हाउस यूनिवर्सिटी मे आप एडमिशन कैसे लोगे और यहा क्या क्या कोर्स और और यहा की फीस के बारे मे आपको जानकारी देंगे। आपको आज हम मिरांडा हाउस के बारे मे सभी जानकारी देंगे। दिल्ली का मिरांडा हाउस Miranda House University of Delhi

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